पावन गंगा नीर ग़ज़ल

Jogeshwar Garg पावन गंगा नीर ग़ज़ल सागर-सी गंभीर ग़ज़ल कान्हा बन कर लाज रखे दौपदियों का चीर ग़ज़ल बुद्धिमान दरबारों में युद्ध-भूमि में वीर ग़ज़ल हिम्मत-सी दिल के अन्दर हाथों में शमशीर ग़ज़ल झरने जैसी बह निकली पर्वत जैसी पीर... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

ghazal

views
16
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[04 Apr 2010 10:09 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix