पावन गंगा नीर ग़ज़ल
पावन गंगा नीर ग़ज़ल सागर-सी गंभीर ग़ज़ल कान्हा बन कर लाज रखे दौपदियों का चीर ग़ज़ल बुद्धिमान दरबारों में युद्ध-भूमि में वीर ग़ज़ल हिम्मत-सी दिल के अन्दर हाथों में शमशीर ग़ज़ल झरने जैसी बह निकली पर्वत जैसी पीर...
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jogeshwar garg
ghazal
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[04 Apr 2010 10:09 AM]



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