कहने को आज़ाद हो गए किन्तु गुलामी जारी है----"चर्चा हिंदी चिट्ठों की"--- ललित शर्मा
नित नेताओं अफ़सरों के एक से बढकर एक घोटाले और भ्रष्ट्राचार के कारनामे सामने आते हैं। जनता की गाढी कमाई को अपनी पैतृक सम्पत्ति समझ कर हजम करने का काम बरसों से चल रहा है। जब भी किसी अधिकारी के यहां छापा पड़ता है तो करोड़ों की बेनामी सम्पत्ति सामने आती है।...
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ललित शर्मा
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[04 Apr 2010 09:26 AM]



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