मेरी पसंद....

किस्सा-कहानी हर सुबह को कोई दोपहर चाहिए,मैं परिंदा हूं उड़ने को पर चाहिए।मैंने मांगी दुआएँ, दुआएँ मिलींउन दुआओं का मुझपे असर चाहिए।जिसमें रहकर सुकूं से गुजारा करूँमुझको अहसास का ऐसा घर चाहिए।जिंदगी चाहिए मुझको मानी भरी,चाहे कितनी भी हो मुख्तसर, चाहिए।लाख उसको अमल में... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना अवस्थी दुबे

कविता

views
43
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
21
[04 Apr 2010 09:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix