‘‘हमारा सूरज’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘‘मयंक’’)
पूरब से जो उगता है और पश्चिम में छिप जाता है। यह प्रकाश का पुंज हमारा सूरज कहलाता है।। रुकता नही कभी भी चलता रहता सदा नियम से, दुनिया को नियमित होने का पाठ पढ़ा जाता है। यह प्रकाश का पुंज हमारा सूरज कहलाता है।। नही किसी से भेद-भाव और वैर कभी रखता है, सदा...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[04 Apr 2010 09:15 AM]



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