माँ !
माँ सपने देखती है
कई बार टूटते हैं
बिखरते हैं सपने
पर माँ कि आदत है सपने देखना, बिखरे हुए सपनो को समेटना
टूटे हुए सपनो को जोड़ना, माँ सपने बुनती है
सपनो को ओढ़कर सोती है
छोटे छोटे सपनो में
सिमटी है उसकी दुनिया, मोम का ह्रदय
रखती...
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nilesh mathur
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[04 Apr 2010 06:57 AM]



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