श्रीगुरुग्रंथ साहिब-चिंता तो अनहोनी घटना की करना चाहिये (shri guru granth sahib-chinta n karen
‘चिंता ता की कीजीअै जो अनहोनी होइ।’इहु मारगु संसार को नानक थिरु नहीं कोइ।।हिन्दी में भावार्थ-चिंता तो उस घटना की करना जो अनहोनी हो। इस संसार में तो सभी कुछ स्वाभाविक रूप घटता रहता है और यहां कुछ भी स्थिर नहीं है। ‘सहस सिआणपा लख होहि त इ न चलै...
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दीपक भारतदीप
धर्म
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[04 Apr 2010 02:52 AM]



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