ये किस मोड़ पर ?..........भाग ३

एक प्रयास गतांक से आगे ...........................अपने हालात के बारे में ना तो निशि किसी से कह सकती थी और ना ही सहन कर पा रही थी. उसे तो यूँ लगा जैसे स्वच्छंद आकाश में विचरण करने वाले पंछी को किसी ने घायल कर दिया हो और वो फ़ड्फ़डाता हुआ जमीन पर आ गिरा हो. धीरे -धीरे... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[04 Apr 2010 02:10 AM]

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