एक पागल का प्रलाप
मेरे दोस्त फ़रीद ख़ान ने दो नई कविताएं लिखी हैं, उर्दू में लिखते तो कहा जाता कि कही हैं, लेकिन हिन्दी में हैं इसलिए लिेखी ही हैं।हिन्दी में कविता मुख्य विधा है फिर भी ऐसी कविताएं विरल हैं।मुलाहिज़ा फ़र्माएं:एक पागल का प्रलापकम्बल ओढ़ कर वह और भी पगला गया,कहने...
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अभय तिवारी
कविता
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[04 Apr 2010 02:04 AM]



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