भूल कर बैठा हूँ

वीर की कलम से कुछ पल जीने की भूल कर बैठा हूँ, अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ| प्यासा रहना किस्मत है और फितरत भी, तेरी आँखों से पीने की भूल कर बैठा हूँ| अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ… यूँ तो आई थी मेरी राह में मोहब्बत कभी, मैं ही इसे खोने की भूल कर... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[04 Apr 2010 00:20 AM]

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