भूल कर बैठा हूँ
कुछ पल जीने की भूल कर बैठा हूँ,
अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ|
प्यासा रहना किस्मत है और फितरत भी,
तेरी आँखों से पीने की भूल कर बैठा हूँ|
अपने ज़ख्म सी ने भूल कर बैठा हूँ…
यूँ तो आई थी मेरी राह में मोहब्बत कभी,
मैं ही इसे खोने की भूल कर...
[पूरी पोस्ट]
वीर
poemhindi poetryshayarighazals
8
0
0
0
0
[04 Apr 2010 00:20 AM]



Shuffle








