बचपन की एक खोई कविता का दोबारा मिलना और इससे उठे कुछ सवाल

तरंग बचपन की किसी कविता का खो जाना कितना मानीख़ेज़ हो सकता है ये तब समझ आया था। आज ठीक से याद तो नहीं आ रहा है...पर शायद 'नागपंचमी' आई थी पिछले साल यानी साल 2009 की। और ज़ेहन में कौंध गई थी मध्‍यप्रदेश के स्‍कूलों में 'बालभारती' में पढ़ाई जाने वाली कविता... [पूरी पोस्ट]
writer yunus
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[04 Apr 2010 00:41 AM]

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