मौन के खाली घर मे- ओम आर्य
मैं तुम्हें हमेशा याद रखना चाहता थाइस तरह कितुम्हारे बारे में सोंचते हुएमैं चबा जाऊं अपने नाख़ूनऔर मुझे दर्द का एहसास तक न होमैं चाहता थाकि तुम मेरी जिन्दगी कासबसे बड़ा दर्द बन कर रहो,एक घाव बन करजिसमें से हमेशा मवाद निकलेताकि तुम्हें बेवफा कहने की जरूरत...
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ओम आर्य
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[04 Apr 2010 00:36 AM]



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