भाषा में वर्गहीनता और लिंगविहीनता का छद्म

नई रोशनी भाषा का प्रयोग और भाषिक संकल्पनाएं वर्गाधारित रही हैं। भाषा को लेकर जितनी भी धारणाएं है उन सबमें एक आम राय है कि भाषा निरपेक्ष नहीं होती। बोलना कभी भी निरपेक्ष नहीं रहा है। भाषिक व्यवहार उदासीनता का व्यवहार नहीं हुआ करता न ही भाषा केवल सम्प्रेषण का... [पूरी पोस्ट]
writer sudha singh

भाषा

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[04 Apr 2010 00:04 AM]

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