बहती रहे नदी.....!
पेड़ों कोसींचते रहनापानी सेताकि बची रहेहरियालीधरती की।चिड़ियों कोडालते रहना दानाताकि बचा रहेसंगीतहवाओं में।ह्रदय मेंउगने देना छंद करुणा केताकि बची रहेनमीतुम्हारी आँखों की।शिशुओं को सुनाते रहना लोरीताकि बचे रहें ख़्वाब आँखों के पन्नों पर।भूखे को खिलाते रहना...
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[03 Apr 2010 23:13 PM]



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