जैन साहित्य:प्राचीन इतिहास-23
अंग-प्रविष्ट व अंग-बाह्य साहित्य -दिग. परम्परानुसार महावीर द्वारा उपदिष्ट साहित्य की ग्रन्थ-रचना उनके शिष्यों द्वारा दो भागों में की गई - एक अंग-प्रविष्ट और दूसरा अंग-बाह्य। अंग-प्रविष्ट के आचारांग आदि ठीक वे ही द्वादश ग्रन्थ थे, जिनका क्रमशः लोप माना...
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HEY PRABHU YEH TERA PATH
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[03 Apr 2010 22:48 PM]



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