अम्मा , भीख मांगने आती है !
योगेन्द्र मौदगिल कहने को तो हास्य कवि हैं मगर जब भी मैंने उन्हें पढ़ा , हर बार एक एक प्रभाव एक छाप रह गयी दिल पर ! गज़ब की धार है उनकी रचनाओं में ! आज उनकी एक सूक्ष्म रचना पढी तो यह दो लाइनें ही हिला गयीं !
" चौराहे की मिटटी को भई जम कर लज्जा आती है...
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सतीश सक्सेना
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[03 Apr 2010 22:00 PM]



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