सबक
जाने वालों को कोई समझाए।यूँ, इस कदर, जाते हुए,यादों के टुकड़े छोड़ा नहीं करते। लम्हें जो एक बार बिखर जाएँ,यूँ बिखरे लम्हों को, जोड़ा नहीं करते। दर्द, जो मिला सबब हमें,किसी के जाने के बाद। सफर का मज़ा कहीं ज्यादा था, सिफ़र।ये सबक सीखा हम ने,मंजिल पे पहुँच...
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[03 Apr 2010 18:13 PM]



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