सपने.....
कभी पलट कर नहीं देखती....उमस भरी बेचेनी है..जिंदगी बेखटक सरपट दौड़ी चली जा रही है..मेरी सांसें कभी कभी थमती हैं..इन्हें चैन नहीं...मेरे सपनो की तरह पल पल बढती नहींइन आँखों में कई ख्वाब जाग रहे हैंजाने कबसेअब तो होश भी नहीं...सपने...सपने.....और बस...
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tanu sharma.joshi
सपने.....
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[03 Apr 2010 14:39 PM]



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