तेरे शहर में .....

विचारों का दर्पण आज नजाने क्यूँ तेरा शहर बेगाना लग रहा है , तेरे शहर के लोग तो पुराने है मै ही इस शहर में नया लग रहा हूँ ॥ आज बहारों ने मेरा स्वागत नहीं किया फिजायें तो वही है , जो मेरे आने कि ख़बर तुझ तक पंहुचा देती थी , जाने क्यूँ आज मै उनके लिए पराया लग रहा हूँ ॥ तेरे... [पूरी पोस्ट]
writer देवेश प्रताप
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[03 Apr 2010 13:30 PM]

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