फिर भी हिस्से आएँ हमारे सिसकियाँ – शिवराम

सृजन और सरोकार फिर भी हिस्से आएँ हमारे सिसकियाँ – शिवराम ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली... [पूरी पोस्ट]
writer रवि कुमार, रावतभाटा
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[03 Apr 2010 11:00 AM]

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