तुम गये क्या - डा. कुमार विश्वास ( tum gaye kyaa )
तुम गए क्या, शहर सूना कर गयेदर्द का आकार दूना कर गयेजानता हूँ फिर सुनाओगे मुझे मौलिक कथाएँ शहर भर की सूचनाएँ, उम्र भर की व्यस्तताएँपर जिन्हें अपना बनाकर, भूल जाते हो सदा तुमवे तुम्हारे बिन, तुम्हारी वेदना किसको सुनाएँफिर मेरा जीवन, उदासी का नमूना कर...
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हरि शर्मा
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[03 Apr 2010 10:25 AM]



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