यार को हम बीच राह छोड दे मुमकिन नही

दर्पण के टुकड़े या तो वक्त से कहो रोके अपनी रफ्तार कोया कही से द्गून्ढ लाये जाके मेरे यार कोयार को हम बीच राह छोड दे मुमकिन नहीं इससे तो बेहतर है ये हम छोड दे सन्सार को जब दिल मे उसके बीज शक का अकुरित हो ही गयादिन बचे क्या बाकी फिर दम तोडने मे प्यार कोआन्धी ना तूफान फिर... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[03 Apr 2010 09:51 AM]

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