नफरत का नाश्ता

पहलू लगता है गलत चुनापर चुनने को कुछ था नहींहोता तो प्यार चुनतानफरत क्यों चुनताजो कोलतार की तरहसदा चिपटी ही रह जाती हैकोई चांस नहीं थाजहां तक दिखा नफरत ही देखीउसी का कुनबा उसी का गांव उसी का देश और उसी की दुनियाजहां वह कम दिखती थीलोग उसे प्यार कहते थेफिर खाली... [पूरी पोस्ट]
writer चंद्रभूषण

कविताएं

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[03 Apr 2010 09:35 AM]

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