सारे जहां से अच्छा
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा,हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलगुला हमारा।बुड्ढे कुंवारियों से नैना लड़ा रहे हैं,मकबूल माधुरी की पेंटिंग बना रहे हैं,ऊपर उगी सफेदी भीतर दबा अंगारा,सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।सत्ता के सिंह बकरी की घास खा रहे...
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Anurag Srivastava
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[03 Apr 2010 07:16 AM]



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