मायासीता का वध - युद्धकाण्ड (15)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण युद्ध में चार पराक्रमी पुत्रों और दो भाइयों के मारे जाने का समाचार सुनकर रावण को बहुत अधिक दुःख और रोष हुआ। हताश होकर वह सोचने लगा कि इस शत्रु से कैसे त्राण पाया जाये। अत्यधिक चिन्तन करने पर पर भी उसे कोई मुक्‍ति नहीं सूझ रही थी। अन्त में उसने मेघनाद को... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया
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[03 Apr 2010 06:20 AM]

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