निरर्थकता का रिश्ता

Kuchh kahi kuchh unkahi हो सकता है मैं तुमसे कुछ सवाल करूँ -मुझमें अनंत जिज्ञासा है।लेकिन मैं जानता हूँ - की जब तुम,उत्तर देने लगोगे - तो मेरे दोनों कान बहरे हो जायेंगे -तुम्हारे समाधान कुछ भी नहीं दे पायेंगे मुझे।जो भी खोजना है - जो भी पाना है - जो भी घटाना है और बढ़ाना है... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[03 Apr 2010 05:45 AM]

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