वो अब नहीं है..

GAP-SHAP KA KONA आज एक नर्सिंग होम में जाना हुआ। वहां रिसेप्शन पर बतौर हेड एक महिला बैठा करती थीं। ऐसा कहें, चार-पांच बार जाने के दौरान उनकी व्यस्तता और कर्मठता ने जेहन में ऐसा खाका खींचा था कि मन कर्म करने को प्रेरित होता था। यू कहें हाइपर एक्टिव। शायद नौ महीने के बाद... [पूरी पोस्ट]
writer prabhat gopal

life...

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[03 Apr 2010 05:53 AM]

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