सानिया मिर्ज़ा---तुम जहाँ भी रहो खुश रहो..(पुरुषों ने तुम्हारे लिए किया क्या है.?)
सानिया....मिर्ज़ा...तुम पहले एक स्त्री हो....तुमने एक ऐसे समाज में जन्म लिया है..जहाँ नारी पुरुष के हाथ की कठपुतली समझी जाती है...कही-कहीं पैर की जूती भी....लेकिन खिलाड़ी तुम खुद बनी...मैदान पर पसीना तुममे...
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कृष्ण मुरारी प्रसाद
पुरुष
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[03 Apr 2010 03:35 AM]



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