1947 टू एके-47

देख कबीरा देश के स्वभामिमान पर जब स्वहित हावी हो जाता है तो पूर्व स्थापित मान्यताएं छीजते चले जाते हैं। एक-एक कर पुराने गौरवशाली इतिहास पर वर्तमान कालिख पोतता चला जाता है। नतीजन, राष्टï्र व समाज संक्रमण काल से गुजरता है। उन परिस्थितियों में भविष्य का स्पष्टï चित्र... [पूरी पोस्ट]
writer सुभाष चन्द्र

एके-47

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[03 Apr 2010 02:24 AM]

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