क्षणिकाएँ !
(१)
व्यापारी हूँ
खरीदता हूँ बेचता हूँ
ईमान धरम जो मिल जाए,
कौड़ियों के दाम मिलता है ये
बिकता है अच्छे भाव! (२)
उनके पसीने कि कमाई
हम खाते हैं
वो बहाते हैं
हम पी जाते हैं! (३)
फूल ने कहा
मत तोड़ो मुझे
महका दूंगा...
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nilesh mathur
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[03 Apr 2010 02:20 AM]



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