ऐसे जीवट पर तिलक करो
नानाजी के 80 वर्ष पूरा होने पर 1997 में मुंबई से एक स्मारिका प्रकाशित की गई थी जिसमें नानाजी के काम के बारे में कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए थे। इसी स्मारिका में प्रभाष जोशी का लेख छपा था। आज जब न तो नानाजी हैं और न ही प्रभाष जी, यह लेख अपने आप में...
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bhaarat kumar
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[03 Apr 2010 00:56 AM]



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