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मेरे पिता श्री कंठमणि बुधौलिया वर्षों समाजवादी आंदोलन से जुडे रहे। मीसा के दौरान जेल यात्रा की। बीडी मजदूरों के हित में कई बडे आंदोलन किए। फिलहाल, वकालात कर रहे हैं। उनकी लिखी एक विद्रोही गजल..बूढे दरख्त सा चरमरा रहा हूं... क्रेता और विक्रेता का ही संबंध...
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अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'
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[03 Apr 2010 00:14 AM]



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