लाल्टू की एक कविता : हुसैन सागर
(दिल्ली से हैदराबाद लौटते हुए)नहीं शहर के उस हिस्से में जहाँ मुझे जाना है दंगा नहीं हुआ है।जहाँ हुआ है, ठीक ठीक किन कारणों से हुआ है, यह मुझे नहीं मालूमपर सोचता हूँ कि हुसैन सागर पर आज शाम कोई न जाएसागर के साथ हुसैन का जुड़ना हिंदुओं को नागवार लग सकता...
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Ek ziddi dhun
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[02 Apr 2010 23:46 PM]



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