भर्तृहरि शतक-अल्पज्ञानियों के स्वर्ग पाने की इच्छा
उन्मतत्तप्रेमसंरम्भादारभन्ते यदंगनाः।तत्र प्रत्यूहमाधातुं ब्रह्मापि खलु कातरः।हिन्दी में भावार्थ-प्रेम में उन्मत होकर युवतियां अपने प्रियतम को पाने के लिये कुछ भी करने लगती हैं। उनके इस कार्य को रोकने का ब्रह्मा भी सामर्थ्य नहीं रखता।स्वपरप्रतारकोऽसौ...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[02 Apr 2010 23:39 PM]



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