...आखिर कोवलम से मेरी सिनेर्जी नहीं हो पाई....किसने सरापा ?(केरल यात्रा संस्मरण -५)
नाश्ते पानी के थोड़ी देर बाद ही उन्नीकृष्णन साहब मिलने को आ गए .साईंस फिक्शन की बाते हुईं -हिन्दी और साईंस फिक्शन की एक ही महादशा हिन्दुस्तान में चल रही है -दोनों भाषावाद के शिकार हैं! मैंने उन्नी से तिरुवनंतपुरम में जल्दी ही एक साईंस फिक्शन गोष्ठी...
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Arvind Mishra
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[02 Apr 2010 23:24 PM]



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