मंच नहीं, भूमि होती है बस्तरिया नाट में : योगेंद्र ठाकुर

आरंभ हर समाज, देश और प्रांत में अपना नाट्य रंग है। बस्तर के उड़ीसा सीमाई क्षेत्र में "नाट" का अपना अलग जलवा है। यही वजह है कि ऋतु परिवर्तन के साथ ग्रामीण नाट करने टोली के साथ निकल पड़ते हैं और दर्शक सारी रात खुले आसमान के नीचे बैठकर इसका आनंद लेते हैं। बस्तर के... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

योगेंद्र ठाकुर

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[02 Apr 2010 23:01 PM]

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