होनहार के खेल -2
भाग-1, 2 से आगे .........जब सभी मेजबान चले गए , तब चंद मेहमान शेष रह गए और वे भी अंत में तंग आकर ताला लगाकर चले गए | सुनसान मेरा साथी बना | उसने भी एक दिन विदा ली और दुदा और तिलोकसीं आये | सिंहासन हाथ लगाते ही मैंने चेतावनी दी - ' सावधान ! मेरे विवाह का...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[02 Apr 2010 21:33 PM]



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