सोते हैं हम सभी
खोते हैं जब कभीरोते हैं हम सभीरटे-रटाए सेतोते हैं हम सभीइक दिन तो होना हैपाया जो खोना हैफिर भी उदास क्यूँहोते हैं हम सभीजग ने ये जाना हैघर ये बेगाना हैनिर्वस्त्र हो कर केसोते हैं हम सभीखा कर के कसमेंरहते हैं जग मेंस्वछंद जीवन क्योंखोते हैं हम सभीटीका...
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Rahul Upadhyaya
nature
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[02 Apr 2010 20:21 PM]



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