सोते हैं हम सभी

उधेड़-बुन खोते हैं जब कभीरोते हैं हम सभीरटे-रटाए सेतोते हैं हम सभीइक दिन तो होना हैपाया जो खोना हैफिर भी उदास क्यूँहोते हैं हम सभीजग ने ये जाना हैघर ये बेगाना हैनिर्वस्त्र हो कर केसोते हैं हम सभीखा कर के कसमेंरहते हैं जग मेंस्वछंद जीवन क्योंखोते हैं हम सभीटीका... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Upadhyaya

nature

views
15
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
1
[02 Apr 2010 20:21 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix