चाह
तुम्हारे साथ सिर्फ़ गीली संवेदनायें नहीं,सुलगते विचार भी बाँटना चाहता हूँ.प्रेम का कोमल, कुचला जा सकने वाला अहसास ही नहींबौद्धिकता का कठोर धरातल भी साझा करना चाहता हूँ.और चाहता हूँ थोड़े हिसाब से खुद को खर्च करनाऔर चाहता हूँ खरीदना - तुम्हें किस्त दर...
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विकास कुमार
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[02 Apr 2010 19:32 PM]



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