अभिव्यक्ति का स्फोट
सांझ धिर आई है। पीपल पर तरह तरह की चिड़ियां अपनी अपनी आवाज में बोल रही हैं। जहां बैठती हैं तो कुछ समय बाद वह जगह पसन्द न आने पर फुदक कर इधर उधर बैठती हैं। कुछ एक पेड़ से उड़ कर दूसरे पर बैठने चली जाती हैं। क्या बोल रहीं हैं वे?! जो न समझ पाये वह (मेरे जैसा)...
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ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey
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[02 Apr 2010 18:30 PM]



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