स्वेच्छाचार

Beyond The Second Sex (स्त्रीविमर्श) एकालाप स्वेच्छाचार हाँ, मैं स्वेच्छाचारी हूँ.उन्होंने मुझे हल में जोतना चाहामैंने जुआ गिरा दिया,उन्होंने मुझपर सवारी गाँठनी चाहीमैंने हौदा ही उलट दिया,उन्होंने मेरा मस्तक रौंदना चाहामैंने उन्हें कुंडली लपेटकर पटक दिया,उन्होंने मुझे जंजीरों में... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee

कविता

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[02 Apr 2010 17:09 PM]

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