लिखाडी़

लिखाडी़ जब महिला आगे बढ़ी या बढ़ाने की बात चली ,हर बार ऐसा ही हुआआधी दुनिया अर्थात गाडी के दूसरे पहिए को बराबरी का दर्जा देने की बात जब भी उठी है, तभी उसका विरोध हुआ है। महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की बात हर जगह मचों से उठती तो है, चर्चे होते हैं, दावे किए... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक मधुप
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[02 Apr 2010 11:01 AM]

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