प्यार नहीं दे पाऊँगा - डा कुमार विश्वास ( pyaar nahee de paaungaa )
ओ कल्पव्रक्ष की सोनजुही!ओ अमलताश की अमलकली!धरती के आतप से जलते..मन पर छाई निर्मल बदली..मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा|तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं |तुम कल्पव्रक्ष का फूल औरमैं धरती का अदना गायकतुम जीवन के उपभोग योग्यमैं नहीं स्वयं अपने...
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हरि शर्मा
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[01 Apr 2010 14:53 PM]



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