"जिंदा मुर्दे"

aapkayogeshsharma उसे लगता था, दुनिया है मुर्दों की, यहाँ बस मुर्दें ही सांस लेते हैं, पिघला के रूहें, बना के नश्तर  उनसे,जान लेते हैं, खून पीते हैं, वो इक ज़माने तक बना रहा इंसान, जीने की हसरत में रोज़ मरता था, हुआ इंसानियत से... [पूरी पोस्ट]
writer Yogesh Sharma

"जिंदा मुर्दे"

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[02 Apr 2010 10:36 AM]

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