मुझे तुम्हारी चाहना है !

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति उन खर्च होते हुए चन्द जमा दिनों में से, उस एक शाम को जब सूरज सुस्ताने लगा और पंक्षी वापस अपने घरों को लौट चले थे । मैंने कुछ कदम चल लेने के बाद उसकी हथेलियों को अपनी अँगुलियों से छूते हुए अपने होने का आभास कराया था । मेरे होने का, नहीं शायद उस एहसास को... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
views
38
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
13
[02 Apr 2010 10:40 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix