हंगामा नही इन्साफ करें .....रिश्तों के साथ

abhivyakti महफ़िल और तन्हाई..दोनों का ही अपना लुत्फ़ है कभी दुनियादार हो जाने को जी चाहता है तो कभी सारे बंधन तोड़कर अपनी सी अलग दुनिया बसाने का मन करता है..लेकिन समाज में रहते हुए कई अनकही सी सीमाओं से बंधकर हम अक्सर चाहतों को पूरी करने की बजाये सही और गलत के फेर में... [पूरी पोस्ट]
writer himani
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[02 Apr 2010 09:45 AM]

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