अपनी मर्जी की नहीं
आम घरों में बेटियाँ साल भर में बड़ी हो जाती हैं और निरंतर बड़ी होती जाती हैं मन की उम्र कीकोई पहचान नहीं होतीनहीं होता उसे प्यार करने का अधिकार उसकी कोई धरतीअपनी मर्जी की नहीं होती हाँ वो बनाती है ज़मीन अपनी मर्जी का अपने मन में पर वहाँ भी पैर लहुलुहान...
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रश्मि प्रभा...
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[02 Apr 2010 05:58 AM]



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