उनके जाने से मौसम रंगत बदल रहा है.

Kuchh kahi kuchh unkahi नम हुयी आँख मेरी और दिल बैठा जा रहा है,या खुदा उनके जाने का दिन करीब आ रहा है।घर आये तो रौशनी का झूमर खिल उठा जैसे,उनके जाने का ख्याल मुझे अब खाए जा रहा है।उनके क़दमों की आहट सुन बुलबुलें गाने लगी ,उनके जाने की बात सुन कोई मर्सिया गा रहा है।वो आये तो जैसे... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[02 Apr 2010 06:03 AM]

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