आज लड्डू को कवितायेँ पढ़ने का मन कर रहा है...आप लोग कवितायों का लिंक दें मेरे कमेन्ट बौक्स में....
आज मुझे कवितायें ही पढनी है....अचानक मुझे लगा कि आज केवल कवितायेँ ही पढनी चाहिए....मैंने खूब गहरायी से सोचा....कि ऐसा क्यों लग रहा है....काफी चिंतन-मनन के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कवितायेँ दिल से निकलती हैं...और आज मैं केवल दिल से...
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कृष्ण मुरारी प्रसाद
कविता
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[02 Apr 2010 04:45 AM]



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