कविता : नानाजी देशमुख
श्रीराम के कर्मभूमि को, नाना तुमने स्वीकार किया, अपना जीवन उनके रजतल, न्योछावर करने का व्रत लिया। तुमने दधीची के समान, अपने देह का दान किया, केवट सा भक्ति भाव ले, चित्रकूट का कल्याण किया।...
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bhaarat kumar
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[02 Apr 2010 03:39 AM]



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