हम कब के मर गये थे ...!!!
हम कब के मरगये थे तेरे प्यार मे ,अदायगी रसमे -जनाज़ा तो है ज़माने की,पता चल गया होता बहुत पहले,पर तूने कसम दी थी ना बताने की ,,बन गयी थी जिंदगी एक बेजान बुत जब हमने ,आहटसुनी थी किसे बेगाने की,,जिंदगी हो गयी थी मौत पर भारी ,जब आया था वक़्त ,प्यार मे मिट...
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कमलेश वर्मा
जिन्दगी
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[02 Apr 2010 03:02 AM]



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